नई सरकार बन गई , एक स्थिर और मज़बूत सरकार जो और कुछ करे या न करे कम से कम ५ सालो तक बिना किसी उठा-पटक के चल तो सकेगी ही..राहुल गाँधी एक मजबूत और लोकप्रिय राजनीतिज्ञ के रूप में सामने आए है,
भारत की राजनीती एक बार फ़िर से युवावो के हाथो में आरही है...चुनाव परिणाम से जो बात सबसे ज्यादा उभर कर सामने आई है..वो ये है की लोकसभा चुनावो में... क्षेत्रीय दलों की बढती संख्या जनता को स्वीकार नही है ,
और राष्ट्रीय राजनीती में दो दलीय व्यवस्था के बारे में सोचा जा सके.... क्योकि बहुदलीय व्यवस्था में कमजोर सरकार और बिखरा विपक्ष ही दिखाई देते है और ये लोकतंत्र के लिए बहुत हानिकारक होते है,
चुनाव परिणामो से सबक सिखने की जरुरत है..... विजेता को भी और विपक्ष को भी...
बड़ी संख्या में अपराधी तत्त्व चुनाव में हारे , दल बदलू अवसरवादी नेताओ का भी यही हाल हुआ.... धर्म जाती की राजनीती का भविष्य भी बुरा ही होने वाला है इसका संकेत चुनावो में ली चुका है। अब मंथन करना होगा.... क्योकि..जनमत जागरूक हो रहा है..और उससे मालूम है की उसे क्या चाहिए..................................

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